गरुड़ मुद्रा

garuda mudra

गरुड़ मुद्रा

विवरण 

अपनी दोनों हथेलियों को पक्षी के पंखों की तरह फैलाएं और अंगूठों को आपस में फंसा लें। सबसे पहले बाईं हथेली को दाहिनी हथेली के ऊपर रखें, अंगूठों को जोड़ें और उन्हें पेट के निचले हिस्से पर रखें। यहाँ दस बार धीरे-धीरे सांस लें। इसके बाद, हथेलियों को पेट के ऊपरी हिस्से यानी नाभि के पास लाएं और फिर से दस बार श्वसन क्रिया करें। अंत में, हाथों को छाती के मध्य (हृदय के पास) लाएं और बाएं हाथ को दाहिने हाथ से अलग करते हुए कंधों की ओर मोड़ें। इसी स्थिति में लगभग चार मिनट तक शांत रहें।

लाभ

  • यह मुद्रा शरीर में रक्त संचार (Blood circulation) में सुधार करती है और अंगों के बीच संतुलन बनाती है।
  • यह पूरे शरीर को जाग्रत कर मन को नई स्फूर्ति और ताजगी प्रदान करती है।
  • गर्भवती महिलाओं को अत्यधिक थकान या सुस्ती महसूस होने पर यह मुद्रा उपयोगी है। साथ ही, यह सांस लेने में कठिनाई वाले लोगों की भी मदद करती है।
  • मन को शांत करने और मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए यह मुद्रा एक बेहतरीन साधन है।

नोट: उच्च रक्तचाप (High BP) वाले लोगों को इस मुद्रा का अभ्यास करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

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