महाशीर्ष मुद्रा

mahasheersha mudra

महाशीर्ष मुद्रा

विवरण

अपने अंगूठे, तर्जनी (index finger) और मध्यमा (middle finger) के पोरों को एक साथ जोड़ें। अनामिका (ring finger) को मोड़कर अंगूठे के निचले हिस्से (जड़/क्रीज) पर रखें। अंत में, कनिष्ठा (छोटी उंगली) को बिना किसी तनाव के सीधा फैलाकर रखें। इस हस्त मुद्रा का अभ्यास अपने दोनों हाथों से एक साथ करें। अपनी आवश्यकता के अनुसार दिन में पांच बार, प्रत्येक बार लगभग 5 मिनट के लिए इस मुद्रा को करना उचित है।

पृष्ठभूमि और सिरदर्द के कारण

सिरदर्द होने के पीछे कई तरह के विविध कारण होते हैं। केवल एक टैबलेट खा लेने से इसे पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता। अक्सर मौसम के बदलाव, आंखों की कमजोरी, गर्दन में जकड़न, साइनस (सर्दी-जुकाम), पेट की खराबी और मूत्राशय (Bladder) की समस्याओं के कारण सिरदर्द हो सकता है। इन दोषों की वजह से सिर के हिस्से में अत्यधिक ऊर्जा एक ही जगह केंद्रित होकर ब्लॉक (बढ़ती हुई जकड़न) हो जाती है, जो गंभीर सिरदर्द का रूप ले लेती है।

लाभ

  • यह मुद्रा सिर में पैदा हुए अत्यधिक तनाव या भारीपन को दूर करने में मदद करती है। यह हमारी चेतना (ध्यान) को सिर से हटाकर शरीर के अन्य अंगों जैसे पेट, हाथ और पैरों की ओर निर्देशित करती है, जिससे ऊर्जा संतुलित हो जाती है।
  • यह मानसिक तनाव को शांत करती है और सर्दी की वजह से होने वाली नाक बंद (Nasal congestion) की समस्या को पूरी तरह ठीक करती है।

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