वज्रप्रदान मुद्रा

vajrapradana

विवरण: अपने दोनों हाथों को छाती के सामने लाएं। अंगूठों को छोड़कर, दोनों हाथों की बाकी चारों उंगलियों को आपस में गूंथते (interlace) हुए कैंची के आकार में जोड़कर पकड़ें। दोनों अंगूठे स्वतंत्र रूप से आकाश की ओर मुख किए हुए होने चाहिए।

मनोवैज्ञानिक महत्व और लाभ:
·किसी व्यक्ति के दृढ़ आत्मविश्वास और स्वस्थ जीवन जीने के लिए उसके भीतर का अटूट विश्वास और भरोसा ही मुख्य आधार (नींव) होता है।
·कुछ परिस्थितियों में मनुष्य के पास विपरीत हालातों का सामना करने का अद्भुत साहस और धैर्य होता है। लेकिन कभी-कभी, जीवन में आने वाले बेहद छोटे-छोटे उतार-चढ़ाव से भी वह हिम्मत हार जाता है और चिंता से घिर जाता है।
·ऐसे समय में व्यक्ति का अपने ऊपर आंतरिक विश्वास और दृढ़ता अत्यंत आवश्यक हो जाती है। हम शारीरिक, मानसिक या भावनात्मक रूप से चाहे किसी भी स्तर पर हों, जब हमारे भीतर कमजोरी आ जाती है, तो असहायता या असुरक्षा की भावना आना स्वाभाविक है।
·इस वज्रप्रदान मुद्रा के नियमित अभ्यास से मन में उठने वाले ऐसे सभी नकारात्मक और हानिकारक विचारों को पूरी तरह से मिटाया जा सकता है। यह हमें आंतरिक शक्ति और अदम्य साहस प्रदान करती है।

 

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
care

Care