पुष्पपुट मुद्रा

pushpaputa mudra

विवरण: अपनी दोनों हथेलियों को एक खोखले कटोरे (दोने) के आकार में आपस में जोड़ें और उन्हें अपनी जांघों पर रख लें। आपकी उंगलियां बिना किसी खिंचाव के शिथिल (ढीली) रहनी चाहिए। हथेलियों को जोड़ते समय दोनों अंगूठे अपनी-अपनी तरफ की तर्जनी (index finger) के बाहरी हिस्से को कोमलता से स्पर्श कर रहे हों।

सिद्धांत और संदेश:
·यह मुद्रा मुख्य रूप से हमारे मन को पूरी तरह से खोलने और प्रकृति द्वारा दिए जाने वाले शुभ फलों या आशीर्वाद को स्वीकार करने का प्रतिनिधित्व करती है। हालांकि नियति या समय कई बार हमें सही रास्ते पर ले जाने का प्रयास करता है, लेकिन हमारे भीतर के एक विशेष प्रकार के डर, संकोच या अज्ञानता के कारण हम उस पर प्रतिक्रिया नहीं देते। इस प्रकार जब हम बदलाव के लिए खुद को तैयार नहीं करते, तो हम जीवन के बेहतरीन अवसरों को खो देते हैं।
·यदि हमारा अंतःकरण पवित्र है, तो कोई भी दुर्भावना या बुराई हमें छू नहीं सकती। यह इस ब्रह्मांड का एक सार्वकालिक नियम है। हमारे विचार जैसे होते हैं, हम वैसी ही चीजों को अपने जीवन की ओर आकर्षित करते हैं।
·इसीलिए मनुष्य के लिए मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन अत्यंत आवश्यक है। हमारे भीतर के नकारात्मक विचारों को पूरी तरह से दूर करना और सकारात्मक भावनाओं को विकसित करना ही सच्ची परिपक्वता (प्रबुद्धता) है। इस विशिष्ट मुद्रा के माध्यम से हम खुले दिल और खुले दिमाग से दुनिया की सभी अच्छी चीजों को अपना बना सकते हैं।

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