कुण्डलिनी मुद्रा

kundalinee mudra

कुण्डलिनी मुद्रा

विवरण

सबसे पहले अपने दोनों हाथों से ढीली मुट्ठी बना लें। फिर बाईं तर्जनी (index finger) को नीचे से दाहिनी मुट्ठी के बीच में डालें। दाहिने अंगूठे को बाईं तर्जनी के पोर (tip) पर दबाकर रखें। इस हस्त मुद्रा को अपने पेट के निचले हिस्से के सामने जितना संभव हो उतना नीचे रखें। प्रतिदिन तीन बार, कुछ मिनट के लिए इस मुद्रा का अभ्यास करना उचित है। 

लाभ

यह मुद्रा मुख्य रूप से हमारे भीतर की यौन ऊर्जा (कुंडलिनी) को जाग्रत करने या उसे क्रियाशील रखने में सहायक है।

सिद्धांत और प्रतीकात्मकता

 यह स्त्री और पुरुष जैसी दो विपरीत शक्तियों के मिलन को दर्शाता है। इतना ही नहीं, यह जीवात्मा के परमात्मा में विलीन होने का भी प्रतीक है। यहाँ, दाहिने हाथ की चार उंगलियाँ हमारे सामने दिखाई देने वाले बाहरी जगत का प्रतिनिधित्व करती हैं, जबकि बाईं तर्जनी हमारे मन और आत्मा का प्रतीक है। इसी प्रकार, अंगूठा दिव्यता या परमात्मा का प्रतीक है।

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