ध्यान मुद्रा

dhyana mudra

ध्यान मुद्रा (चिंतन और एकाग्रता की मुद्रा)

विवरण और अभ्यास विधि

ध्यान की मुद्रा में बैठकर, अपने दाहिने हाथ को बाएं हाथ की हथेली के ऊपर रखते हुए अपनी गोदी में टिका लें। इस स्थिति में, दोनों हाथों के अंगूठों के पोर (tips) आमने-सामने होने चाहिए और हल्के से एक-दूसरे को स्पर्श करने चाहिए। अपनी दैनिक आध्यात्मिक साधना के अनुसार आप जितनी देर चाहें, उतनी देर इस मुद्रा में बने रह सकते हैं।

आध्यात्मिक और मानसिक लाभ

  • यह पारंपरिक मुद्रा हमारे समग्र व्यक्तित्व में गहरी शांति, पवित्रता और सात्विक गुणों को जाग्रत करती है।
  • यह भटकते हुए विचारों को नियंत्रित करने, किसी भी एक विषय पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित करने (एकाग्रता बढ़ाने) और आंतरिक ऊर्जा को संचित करने का एक सर्वोत्कृष्ट मार्ग है।
  • भगवान बुद्ध की प्रतिमाओं और प्राचीन योगियों की मूर्तियों में हमें अक्सर दिखने वाली यह स्थिति, मनुष्य को परम शांति की एक दिव्य और अलौकिक अनुभूति प्रदान करती है।

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