सुरभि मुद्रा

surabhi mudra

सुरभि मुद्रा या गौ मुद्रा
विवरण: इस मुद्रा को करने के लिए दोनों हाथों की उंगलियों को इस प्रकार संयोजित करना चाहिए: बाएं हाथ की कनिष्ठा (छोटी उंगली) दाहिने हाथ की अनामिका (ring finger) को छुए, और दाहिने हाथ की कनिष्ठा बाएं हाथ की अनामिका को स्पर्श करे। इसी तरह, दोनों हाथों की मध्यमा उंगलियां एक-दूसरे के विपरीत हाथ की तर्जनी (index finger) को स्पर्श करनी चाहिए। केवल अंगूठे सीधे फैले रहने चाहिए। दिखने में यह मुद्रा गाय के चार थनों की आकृति के समान लगती है।

अभ्यास और लाभ:
·इस मुद्रा का प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट अभ्यास करना उत्तम है। विशेष रूप से जोड़ों के दर्द और गठिया (Arthritis) से पीड़ित लोगों के लिए यह रामबाण की तरह काम करती है। पुरानी समस्या वाले लोगों को इसे अधिक समय तक करना चाहिए।
·व्यवस्थित साधना से ध्यान की अवस्था में उच्च स्तर के आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त किए जा सकते हैं।
·यह शरीर में वात, पित्त और कफ नामक त्रिदोषों का संतुलन बनाए रखने में सहायक है।
·धार्मिक अनुष्ठानों में, विशेषकर गायत्री मंत्र का जप करते समय इस मुद्रा का प्रदर्शन करने से मंत्र का प्रभाव दस गुना ब

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