संधि मुद्रा

sandhi mudra gesture for playing a vital role in maintaining the optimal health and functional efficiency of all major joints in our body.

संधि मुद्रा (जोड़ों के दर्द और संतुलन की मुद्रा)

विवरण और अभ्यास विधि

दाहिने हाथ की स्थिति: अपने दाहिने हाथ के अंगूठे और अनामिका (ring finger) उंगली के पोरों (tips) को आपस में मिलाकर हल्के से स्पर्श करें। बाकी उंगलियों को सीधा रखें।
बाएं हाथ की स्थिति: ठीक इसी समय, अपने बाएं हाथ के अंगूठे और मध्यमा (middle finger) उंगली के पोरों को एक साथ आपस में जोड़ें। अन्य उंगलियों को बिना किसी तनाव के सीधा फैलाकर रखें।
इस विशेष मुद्रा का अभ्यास दिन में चार बार, प्रत्येक बार 15 मिनट की अवधि के लिए नियमित रूप से करना बेहद फायदेमंद है। यदि जोड़ों का दर्द बहुत अधिक या तीव्र हो, तो इस उपचारात्मक मुद्रा को दिन में छह बार तक भी दोहराया जा सकता है। इस मुद्रा के अभ्यास के साथ-साथ हल्के योगासनों को करने से शरीर को और भी बेहतरीन परिणाम मिलते हैं।

शारीरिक लाभ

  • यह मुद्रा हमारे शरीर के सभी प्रमुख जोड़ों (Joints) की कार्यप्रणाली को सुचारू और तंदुरुस्त बनाए रखने में मदद करती है।
  • विशेष रूप से घुटनों, कोहनियों और अन्य अंगों के जोड़ों में होने वाले दर्द, जकड़न और वायु दोष को नियंत्रित कर यह शरीर में तत्वों का उचित संतुलन बनाए रखती है।

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