शक्ति मुद्रा

shakthi mudra

विवरण: दोनों हाथों की अनामिका (ring finger) और कनिष्ठा (little finger) के पोरों को आपस में मिलाकर सीधा रखें। अपने अंगूठों को अपनी-अपनी हथेलियों के अंदर मोड़ लें। अब शेष बची उंगलियों (तर्जनी और मध्यमा) को इन अंगूठों के ऊपर बिना किसी दबाव के ढीला मोड़कर रखें।
इस स्थिति में रहते हुए अपना पूरा ध्यान अपनी श्वास प्रक्रिया पर केंद्रित करें। विशेष रूप से अपनी सांसों की गति को धीमा करें और बहुत धीरे-धीरे श्वास बाहर छोड़ें (प्रश्वास)। अपनी आवश्यकता के अनुसार या दिन में तीन बार, 10-10 मिनट के लिए इसका अभ्यास करना उचित है।

लाभ और सावधानी:
·शक्ति मुद्रा छाती के निचले हिस्से और पेट के निचले (pelvic) क्षेत्र में श्वसन क्रिया को अधिक गहरा और तीव्र करने में मदद करती है।
·यह पूरे शरीर को आंतरिक शांति प्रदान करती है, जिससे रात में सुखद और गहरी नींद आने में मदद मिलती है।
·सावधानी: इस मुद्रा का अभ्यास एक निश्चित सीमा के भीतर ही किया जाना चाहिए। सीमा से अधिक अभ्यास करने पर शरीर में आलस्य, सुस्ती या जड़ता का भाव पैदा हो सकता है।
·यह पेट के निचले हिस्से में एक सुखद और ताज़गी भरा अहसास कराती है। इसके परिणामस्वरूप आंतों का खिंचाव या ऐंठन दूर होती है और महिलाओं में मासिक धर्म (Periods) से जुड़ी परेशानियां ठीक होती हैं।

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