शिवलिंग मुद्रा

shivalinga mudra

शिवलिंग मुद्रा

विवरण

अपने बाएं हाथ को एक कटोरी या नाव की आकृति में मोड़कर रखें। इसके ऊपर अपने दाहिने हाथ की मुट्ठी बनाकर स्थापित करें। ध्यान रहे कि दाहिने हाथ का अंगूठा ऊपर आकाश की ओर बिल्कुल सीधा और लंबवत (vertical) होना चाहिए। बाएं हाथ की उंगलियां आपस में सटी हुई होनी चाहिए। इस मुद्रा को अपने निचले पेट के सामने रखें, जिससे आपकी कोहनियां बाहर की ओर हों और शरीर से थोड़ी आगे की तरफ निकली हुई रहें।

दार्शनिक पृष्ठभूमि

इस विशिष्ट मुद्रा में दाहिना हाथ पुरुष शक्ति (दिव्य पुरुष तत्व) का प्रतीक है। भगवान शिव यद्यपि लय (विनाश) के कारक हैं, परंतु वे पुराने को समाप्त कर नई सृष्टि के निर्माण की नींव रखते हैं।

लाभ

  • अत्यधिक थकान से पीड़ित होने पर यह शरीर को तुरंत आराम पहुंचाने और ऊर्जा वापस लाने में मदद करती है।
  • जब मन में असंतोष, बेचैनी, व्याकुलता या निरुत्साह (उदासी) का भाव हो, तो यह उसे दूर कर नए उत्साह का संचार करती है।
  • यह शरीर और मन को शांत करने वाले अद्भुत उपशामक (calming) गुणों से भरपूर है।

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