त्से मुद्रा

tse mudra

त्से मुद्रा

विवरण

सबसे पहले अपनी दोनों हथेलियों को अपनी जांघों पर रख लें। इसके बाद अंगूठे के पोर (tip) को कनिष्ठा (छोटी उंगली) के निचले हिस्से (जड़) से स्पर्श कराएं। अब, धीरे-धीरे सांस अंदर खींचते हुए (पूरक), इस मुड़े हुए अंगूठे को बाकी की चारों उंगलियों से कसकर ढक लें और एक मुट्ठी बना लें। अपनी सांस को कुछ समय के लिए भीतर ही रोक कर रखें (कुंभक)।
इस स्थिति में रहते हुए, अपने मन के अंतस में सात बार ‘ओमकार’ (ॐ) नाद का जप करने की कल्पना करें। उस प्रणव मंत्र के कंपन आपके दाहिने कान में गूंजने चाहिए। इसके बाद, निचले पेट से सांस को बहुत धीरे-धीरे बाहर छोड़ते हुए (रेचक) अपनी उंगलियों को ढीला करें और हथेलियों को खोल दें। इस क्षण यह महसूस करें कि आपके भीतर की संपूर्ण चिंता, भय, घबराहट और उदासी शरीर से पूरी तरह दूर जा रही है।

अभ्यास की विधि और लाभ

  • इस मुद्रा की प्रक्रिया को एक बार में लगातार सात बार किया जा सकता है। इस प्रकार दिन भर में कुल सात बार इसका अभ्यास करना उचित माना जाता है।
  • जब मन व्याकुल हो, अत्यधिक डर सता रहा हो या मानसिक निराशा को दूर करना हो, तो यह मुद्रा एक सर्वोत्तम उपाय है।
  • यह व्यक्ति की अंतर्दृष्टि (Intuition) को जाग्रत करती है और आत्मनिरीक्षण करने में मदद करती है।

विशेष नोट: योगशास्त्र के अनुसार, जब हमारे शरीर में जल तत्व की कमी हो जाती है, तब भी मनुष्य अवसाद (Depression) या खिन्नता का शिकार हो जाता है। यह मुद्रा उस तत्व को संतुलित करती है।

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