आवाहन मुद्रा

aavaahanee mudra

आवाहन मुद्रा

विवरण 

इस मुद्रा का मुख्य रूप से देवताओं को आमंत्रित करने या उनका स्वागत करने के लिए उपयोग किया जाता है। अपनी दोनों हथेलियों को आपस में जोड़ें और उन्हें थोड़ा तिरछा रखें। इस स्थिति में अंगूठे हथेलियों के अंदरूनी हिस्से की ओर होने चाहिए। मंत्रों का उच्चारण करते हुए ईश्वर की आराधना में लीन होने पर, साधक अपने भीतर एक अद्वितीय दैवीय अनुभूति महसूस करता है।

लाभ

देव-पूजन के समय मन को सदैव प्रफुल्लित और सक्रिय रखने में यह मुद्रा सहायता करती है। इसके निरंतर अभ्यास से व्यक्ति में परमानंद और अपार उत्साह की भावनाएं जागृत होती हैं।

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