मातंगी मुद्रा

maatangi mudra

मातंगी मुद्रा (आंतरिक शांति और पाचन की मुद्रा)
विवरण और अभ्यास विधि:
अपने दोनों हाथों को पेट के हिस्से में स्थित मणिपुर चक्र (सौर चक्र/उदर भाग) के सामने लाएं और उंगलियों को आपस में फंसा लें (इंटरलॉक करें)। इस स्थिति में, केवल दोनों हाथों की मध्यमा (middle fingers) उंगलियों को सीधा रखें और उनके पोरों (tips) को एक-दूसरे से स्पर्श कराएं। इस मुद्रा का नियमित रूप से दिन में तीन बार, प्रत्येक बार कम से कम 3 मिनट के लिए अभ्यास करें।

शारीरिक और आंतरिक लाभ:
·यह मुद्रा मणिपुर चक्र के क्षेत्र में होने वाली श्वसन क्रिया को सुचारू बनाती है और उस हिस्से के ऊर्जा केंद्रों को संतुलित करती है।
·यह शरीर के भीतर पंचतत्वों में से एक ‘पृथ्वी तत्व’ को जाग्रत और सक्रिय करती है।
·मातंगी मुद्रा के निरंतर अभ्यास से हृदय, जठर (पेट), पित्ताशय (Gallbladder), ग्रहणी (Duodenum), प्लीहा (Spleen), अग्न्याशय (Pancreas) और गुर्दे (Kidneys) जैसे महत्वपूर्ण अंगों का स्वास्थ्य और कार्यक्षमता बढ़ती है।
·यह अत्यधिक तनाव या उत्तेजना के कारण तेजी से धड़कते हुए (व्यग्र) हृदय को शांत करने में बहुत मददगार है।
·इसके अलावा, यह पाचन तंत्र में रुकावट पैदा करने वाले आंतरिक तनाव और विकारों को दूर कर पाचन क्रिया (Digestion) को दुरुस्त और सुगम बनाती है।

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