भुदि मुद्रा

bhudi mudra hand gesture for recurring issues like dry mouth, eye strain, dry eyes, and burning sensations in the eyes.

भुदि मुद्रा (जल-संतुलन की मुद्रा / फ्लूइड बैलेंसर)

विवरण और अभ्यास विधि

अपने अंगूठे और कनिष्ठा (छोटी उंगली) के पोरों (tips) को एक साथ लाएं और उन्हें हल्के से आपस में दबाएं। इस दौरान बची हुई अन्य तीनों उंगलियों (तर्जनी, मध्यमा और अनामिका) को बिना मोड़े बिल्कुल सीधा और ढीला रखें। इस मुद्रा का अभ्यास अपने दोनों हाथों से एक साथ करें। नियमित रूप से दिन में तीन बार, प्रत्येक बार 15 मिनट के लिए इस मुद्रा का अभ्यास करना उचित माना जाता है।

शारीरिक लाभ और वैज्ञानिक महत्व

  • हमारे मानव शरीर का आधे से अधिक हिस्सा बुनियादी तौर पर तरल पदार्थ (जल) से निर्मित है।
  • यह मुद्रा शरीर में मौजूद तरल पदार्थों (Fluids) की मात्रा को नियंत्रित करती है और उनके स्वस्थ संतुलन को बनाए रखने में मदद करती है।
  • यह बार-बार होने वाले मुंह के सूखने की समस्या, आंखों की थकान, सूखी आंखें (Dry eyes) और आंखों में होने वाली जलन को प्रभावी ढंग से ठीक करती है।
  • इसके अलावा, मूत्राशय (Urinary bladder) और वृक्क (किडनी) के क्षेत्र में होने वाली किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या असंतुलन को दूर करने के लिए यह मुद्रा अत्यंत गुणकारी है।
  • इसके नियमित अभ्यास से जीभ की स्वाद ग्रहण करने की क्षमता (Taste sensitivity) में काफी सुधार होता है।

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