भ्रमर मुद्रा

bhramara mudra

भ्रमर मुद्रा (एलर्जी नाशक मुद्रा)
विवरण और अभ्यास विधि: अपनी तर्जनी (index finger) को पूरी तरह से मोड़कर अंगूठे के जोड़ (आधार वाले हिस्से) पर रखें। इसके बाद, अपने अंगूठे के अग्रभाग (tip) को मध्यमा (middle finger) उंगली के नाखून के बगल में सटाकर मजबूती से दबाएं। इस दौरान बची हुई दोनों उंगलियों (अनामिका और कनिष्ठा) को बाहर की ओर सीधा फैलाकर रखें। इस मुद्रा का नियमित रूप से दिन में चार बार, प्रत्येक बार 5 मिनट के लिए अभ्यास करें।

शारीरिक लाभ और वैज्ञानिक महत्व:
·यह मुद्रा विभिन्न प्रकार की एलर्जी (Allergies) को शांत करने और शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाने में बेहद मददगार है।
·वर्तमान समय में एलर्जी या संक्रमण के इलाज के लिए उपयोग की जाने वाली एंटीबायोटिक्स (Antibiotics) और अन्य कड़क दवाएं अक्सर हमारी आंतों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं।
·आंतों में होने वाली इस गड़बड़ी के सीधे परिणाम स्वरूप व्यक्ति को नाक बंद होना, श्वसन नलिका और आंतों में अत्यधिक बलगम (Mucus) जमा होने से सांस लेने में रुकावट आना, और त्वचा पर लाल चकत्ते (Rashes) उभरना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
·इस प्रकार की सभी द्वितीयक (secondary) एलर्जी जनित समस्याओं को जड़ से खत्म करने के लिए भ्रमर मुद्रा एक सर्वोत्तम प्राकृतिक उपचार है।

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