अस्थमा मुद्रा

asthama mudra

अस्थमा मुद्रा (दमा नाशक मुद्रा)

विवरण और अभ्यास विधि

अपने दोनों हाथों की मध्यमा (middle fingers) उंगलियों को मोड़ें और उनके नाखूनों के पिछले हिस्से को आपस में एक-दूसरे पर मजबूती से दबाकर रखें। इस दौरान बाकी बची सभी उंगलियों (अंगूठे, तर्जनी, अनामिका और कनिष्ठा) को बाहर की ओर सीधा और पूरी तरह मुक्त (ढीला) रखें।

आपातकालीन निर्देश और नियम

  • जब भी अचानक दमे (Asthma) का तीव्र दौरा पड़े या सांस लेने में भारी तकलीफ महसूस हो, तो सबसे पहले ‘सूक्ष्म श्वासनाळ मुद्रा’ का अभ्यास करना चाहिए।
  • उसके तुरंत बाद, इस अस्थमा मुद्रा का अभ्यास तब तक लगातार करते रहना चाहिए जब तक कि सांसों की गति पूरी तरह लयबद्ध और सामान्य स्थिति में न लौट आए।

दीर्घकालिक उपचार

फेफड़ों या श्वसन तंत्र से संबंधित पुरानी बीमारियों के स्थायी समाधान (दीर्घकालिक उपचार) के लिए, सूक्ष्म श्वासनाळ मुद्रा और अस्थमा मुद्रा इन दोनों का प्रतिदिन नियम पूर्वक 5-5 मिनट के लिए दिन में कुल पांच बार अभ्यास करना अत्यंत लाभकारी है।

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