सूर्य मुद्रा

surya mudra

सूर्य मुद्रा

विवरण

पनी अनामिका (ring finger) को मोड़ें और उसके पोर (tip) को अंगूठे के निचले हिस्से (जड़) से स्पर्श कराएं। इसके बाद, अंगूठे को चित्र में दिखाए अनुसार अनामिका उंगली के ऊपर रखें और हल्का सा दबाव डालें। बाकी बची तीन उंगलियां बिल्कुल सीधी रहनी चाहिए।

विज्ञान और सामुद्रिक सिद्धांत

सामुद्रिक शास्त्र के नियमों के अनुसार, हमारे हाथ की अनामिका उंगली सूर्य के स्थान (सूर्य पर्वत) का प्रतिनिधित्व करती है। इसलिए, जब इस अनामिका उंगली को अंगूठे से दबाया जाता है, तो शरीर में सूर्य तत्व से संबंधित उष्ण ऊर्जा प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होती है।

लाभ और अभ्यास का समय

  • सूर्य मुद्रा के नियमित अभ्यास से किसी भी प्रकार के सिरदर्द को आसानी से शांत और ठीक किया जा सकता है।
  • सर्वोत्तम और सकारात्मक परिणामों के लिए, इस मुद्रा का दोनों हाथों से एक साथ प्रतिदिन 45 मिनट तक अभ्यास करने की सलाह दी जाती है।
  • यह मुद्रा शरीर में जमा अतिरिक्त वसा (मोटापे या चर्बी) को पिघलाने की अद्भुत क्षमता रखती है।
  • वजन घटाने के इच्छुक लोगों के लिए यह बहुत फायदेमंद है।
  • इसके अलावा, यह सांस लेने में होने वाली तकलीफों को दूर करती है और सर्दियों के मौसम में होने वाले सर्दी-जुकाम को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करती है।

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